किसान संगठनों और सरकार की बातचीत रही बेनतीजा, अब दिल्ली कूच करने का फैसला

किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। सरकार के मंत्रियों से बातचीत के बाद किसान नेताओं ने 13 फऱवरी यानी आज दिल्ली कूच करने की बात दोहराई है। किसान संगठनों को मनाने के लिए सोमवार देर रात चंडीगढ़ में सरकार के कई मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। ये बैठक काफ़ी देर तक चली मगर किसानों को मनाने में सरकार विफल रही। ऐसे में किसानों के दिल्ली आने के एलान को देखते हुए दिल्ली से सटी सीमा पर बैरिकेटिंग लगाई गई है। केंद्र सरकार के मंत्रियों ने क्या बताया? सरकार की तरफ़ से बातचीत में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय शामिल रहे। बैठक के बाद अर्जुन मुंडा ने बताया, किसान संगठनों के साथ बातचीत बहुत गंभीरतापूर्वक हुई। सरकार हमेशा चाहती है कि बातचीत के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ हम यहाँ आएं। भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर हम आए। मुंडा ने कहा, ऐसे सभी विषयों पर चर्चा हुई, जहाँ हम सहमति तक पहुँचे। लेकिन कुछ ऐसे विषय रहे, जिनको लेकर हमने कहा था कि इसके बहुत सारे ऐसे जुड़े हुए मामले हैं, जिस पर हमें अस्थायी समाधान निकालने के लिए कमिटी बनाने की ज़रूरत है और उसमें हम उसमें अपनी बातें रखें, स्थायी समाधान निकालें। मुंडा बोले, हम ऐसा मानते हैं कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के ज़रिए निकाला जा सकता है। हम आशान्वित हैं कि हम इसका समाधान मिलकर निकालने में सफल रहेंगे। ऐसी कोशिश करेंगे कि देश के किसान और जनमानस के हितों की रक्षा हो। हम अभी भी आशान्वित हैं कि किसान संगठन बातचीत करें। कुछ ऐसे पक्ष हैं, जिन पर आगामी दिनों में समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। हम अभी भी बातचीत करना चाहते हैं। किसान नेताओं ने क्या बताया? संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक जगजीत सिंह धालीवाल ने कहा, बैठक बहुत लंबी चली है। बहुत चर्चा हुई। एक-एक मांग पर चर्चा हुई। मैं स्पष्ट कर दूं कि ये मांगें नहीं थीं। ये अलग-अलग समय पर सरकार के हमसे किए वादे थे। उनके ऊपर सरकार सहमति बनाने की बजाय ऐसा करती है कि इसके ऊपर कमिटी बनाएंगे। पहले भी एमएसपी की गारंटी देने की बात कही गई थी। इसके अलावा स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट जो काफ़ी चर्चा के बाद बनी हुई है। उसको लागू करना है। धालीवाल ने दावा किया, कर्ज मुक्ति की जब बात आती है तो सरकार उस पर गंभीर नहीं है। लेकिन कॉर्पोरेट का साढ़े 14 लाख करोड़ सरकार ने माफ़ किया है। दिल्ली कूच करने के सवाल पर धालीवाल कहते हैं, सारे बैठकर चर्चा करेंगे। मेरी राय है कि कल हम 10 बजे आगे बढ़ेंगे। किसान मज़दूर मोर्चा के समन्वयक एसएस पंढेर ने कहा, हां हम 10 बजे दिल्ली की ओर जाएंगे। सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। वो सिफऱ् समय निकालना चाहती है। हम लोगों ने पूरी कोशिश की है कि हमारे पक्ष में कोई फ़ैसला आए। पर बैठक में हमें ऐसा कुछ लगा नहीं। पंढेर बोले-जब सरकार बुलाएगी तो हम जाएंगे। अब बैठक में कुछ दें या ना दें, ये उनकी मजऱ्ी है। हमने सरकार का भाव देख लिया है। हमें नहीं लगता कि सरकार हमारी मांगों को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, हम किसी किस्म का टकराव नहीं चाहते। हम चाहते थे कि सरकार किसी मुद्दे पर हमें कुछ दे दे तो हम आंदोलन के बारे में सोचें। सरकार के मन में खोट है, वो हमारा आंदोलन बस टाइम पास करवाना चाहती है। देना कुछ नहीं चाहती। सरकार ने जो प्रस्ताव दिए, हम उन पर चर्चा करेंगे। पर हमें मजबूरन 10 बजे आंदोलन आगे बढ़ाना होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में 32 किसान संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया था, अब 50 किसान संगठन एकजुट हैं। किसान मजदूर संघर्ष कमिटी के नेता सुखविंदर सिंह साभरा ने आंदोलन में शामिल संगठनों के बारे में जानकारी दी। साभरा ने बताया, पूरे उत्तर भारत, दक्षिण भारत, पश्चिम और पूर्वी भारत से 200 से ज्यादा संगठन दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। ये आंदोलन जो अधूरा छोडक़र आए थे, उसको पूरा कराने के लिए दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे। किसानों की मांग क्या है? एमएसपी खरीद की गारंटी दें, नोटिफिकेशन जारी करें स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू करें किसानों की लागत खर्चे पर 50 फीसदी मुनाफा दिया जाए किसानों के कर्ज माफ किए जाएं किसान आंदोलन के दौरान जो केस दर्ज किए गए थे, वो वापस लिए जाएं मनरेगा में 200 दिन काम देने और दिहाड़ी 700 रुपये करें सुरक्षा के इंतज़ाम किसानों के राजधानी आने के एलान को देखते हुए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सीमा पर बड़ी संख्या में बैरिकेटिंग लगाई गई है। दिल्ली की ओर आती मुख्य सडक़ों पर भी कंटेनर, बसों और क्रेन रखी गई हैं। कुछ जगहों पर सीमेंट की बैरिकेटिंग लगाई गई हैं। 2020 में हुए किसान आंदोलन में भी ऐसी बैरिकेटिंग देखने को मिली थी। दिल्ली पुलिस ने एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी है। पुलिस ने कहा है प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर ट्रॉली का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे अन्य वाहन चालकों को असुविधा हो सकती है। इसके देखते हुए नई दिल्ली में ट्रैक्टरों के चलने पर बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने कुछ बातों पर रोक लगाई है। सडक़ जाम करने, रास्ता रोकने और रैली करने पर रोक। ट्रैक्टर ट्रॉली के घुसने पर रोक। लाठी डंडों और हथियार से भरे वाहनों पर रोक। ईंट, पत्थर, एसिड, पेट्रोल जमा करने पर प्रतिबंध। दिल्ली की सभी सीमाओं पर सुरक्षा जांच अनिवार्य भडक़ाऊ नारे और पोस्टर लगाने पर रोक। बगैर अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल प्रतिबंधित। ड्यूटी पर जा रहे सरकार कर्मचारियों को प्रतिबंधों से छूट। (bbc.com/hindi)

किसान संगठनों और सरकार की बातचीत रही बेनतीजा, अब दिल्ली कूच करने का फैसला
किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। सरकार के मंत्रियों से बातचीत के बाद किसान नेताओं ने 13 फऱवरी यानी आज दिल्ली कूच करने की बात दोहराई है। किसान संगठनों को मनाने के लिए सोमवार देर रात चंडीगढ़ में सरकार के कई मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। ये बैठक काफ़ी देर तक चली मगर किसानों को मनाने में सरकार विफल रही। ऐसे में किसानों के दिल्ली आने के एलान को देखते हुए दिल्ली से सटी सीमा पर बैरिकेटिंग लगाई गई है। केंद्र सरकार के मंत्रियों ने क्या बताया? सरकार की तरफ़ से बातचीत में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय शामिल रहे। बैठक के बाद अर्जुन मुंडा ने बताया, किसान संगठनों के साथ बातचीत बहुत गंभीरतापूर्वक हुई। सरकार हमेशा चाहती है कि बातचीत के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ हम यहाँ आएं। भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर हम आए। मुंडा ने कहा, ऐसे सभी विषयों पर चर्चा हुई, जहाँ हम सहमति तक पहुँचे। लेकिन कुछ ऐसे विषय रहे, जिनको लेकर हमने कहा था कि इसके बहुत सारे ऐसे जुड़े हुए मामले हैं, जिस पर हमें अस्थायी समाधान निकालने के लिए कमिटी बनाने की ज़रूरत है और उसमें हम उसमें अपनी बातें रखें, स्थायी समाधान निकालें। मुंडा बोले, हम ऐसा मानते हैं कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के ज़रिए निकाला जा सकता है। हम आशान्वित हैं कि हम इसका समाधान मिलकर निकालने में सफल रहेंगे। ऐसी कोशिश करेंगे कि देश के किसान और जनमानस के हितों की रक्षा हो। हम अभी भी आशान्वित हैं कि किसान संगठन बातचीत करें। कुछ ऐसे पक्ष हैं, जिन पर आगामी दिनों में समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। हम अभी भी बातचीत करना चाहते हैं। किसान नेताओं ने क्या बताया? संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक जगजीत सिंह धालीवाल ने कहा, बैठक बहुत लंबी चली है। बहुत चर्चा हुई। एक-एक मांग पर चर्चा हुई। मैं स्पष्ट कर दूं कि ये मांगें नहीं थीं। ये अलग-अलग समय पर सरकार के हमसे किए वादे थे। उनके ऊपर सरकार सहमति बनाने की बजाय ऐसा करती है कि इसके ऊपर कमिटी बनाएंगे। पहले भी एमएसपी की गारंटी देने की बात कही गई थी। इसके अलावा स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट जो काफ़ी चर्चा के बाद बनी हुई है। उसको लागू करना है। धालीवाल ने दावा किया, कर्ज मुक्ति की जब बात आती है तो सरकार उस पर गंभीर नहीं है। लेकिन कॉर्पोरेट का साढ़े 14 लाख करोड़ सरकार ने माफ़ किया है। दिल्ली कूच करने के सवाल पर धालीवाल कहते हैं, सारे बैठकर चर्चा करेंगे। मेरी राय है कि कल हम 10 बजे आगे बढ़ेंगे। किसान मज़दूर मोर्चा के समन्वयक एसएस पंढेर ने कहा, हां हम 10 बजे दिल्ली की ओर जाएंगे। सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। वो सिफऱ् समय निकालना चाहती है। हम लोगों ने पूरी कोशिश की है कि हमारे पक्ष में कोई फ़ैसला आए। पर बैठक में हमें ऐसा कुछ लगा नहीं। पंढेर बोले-जब सरकार बुलाएगी तो हम जाएंगे। अब बैठक में कुछ दें या ना दें, ये उनकी मजऱ्ी है। हमने सरकार का भाव देख लिया है। हमें नहीं लगता कि सरकार हमारी मांगों को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, हम किसी किस्म का टकराव नहीं चाहते। हम चाहते थे कि सरकार किसी मुद्दे पर हमें कुछ दे दे तो हम आंदोलन के बारे में सोचें। सरकार के मन में खोट है, वो हमारा आंदोलन बस टाइम पास करवाना चाहती है। देना कुछ नहीं चाहती। सरकार ने जो प्रस्ताव दिए, हम उन पर चर्चा करेंगे। पर हमें मजबूरन 10 बजे आंदोलन आगे बढ़ाना होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में 32 किसान संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया था, अब 50 किसान संगठन एकजुट हैं। किसान मजदूर संघर्ष कमिटी के नेता सुखविंदर सिंह साभरा ने आंदोलन में शामिल संगठनों के बारे में जानकारी दी। साभरा ने बताया, पूरे उत्तर भारत, दक्षिण भारत, पश्चिम और पूर्वी भारत से 200 से ज्यादा संगठन दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। ये आंदोलन जो अधूरा छोडक़र आए थे, उसको पूरा कराने के लिए दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे। किसानों की मांग क्या है? एमएसपी खरीद की गारंटी दें, नोटिफिकेशन जारी करें स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू करें किसानों की लागत खर्चे पर 50 फीसदी मुनाफा दिया जाए किसानों के कर्ज माफ किए जाएं किसान आंदोलन के दौरान जो केस दर्ज किए गए थे, वो वापस लिए जाएं मनरेगा में 200 दिन काम देने और दिहाड़ी 700 रुपये करें सुरक्षा के इंतज़ाम किसानों के राजधानी आने के एलान को देखते हुए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सीमा पर बड़ी संख्या में बैरिकेटिंग लगाई गई है। दिल्ली की ओर आती मुख्य सडक़ों पर भी कंटेनर, बसों और क्रेन रखी गई हैं। कुछ जगहों पर सीमेंट की बैरिकेटिंग लगाई गई हैं। 2020 में हुए किसान आंदोलन में भी ऐसी बैरिकेटिंग देखने को मिली थी। दिल्ली पुलिस ने एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी है। पुलिस ने कहा है प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर ट्रॉली का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे अन्य वाहन चालकों को असुविधा हो सकती है। इसके देखते हुए नई दिल्ली में ट्रैक्टरों के चलने पर बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने कुछ बातों पर रोक लगाई है। सडक़ जाम करने, रास्ता रोकने और रैली करने पर रोक। ट्रैक्टर ट्रॉली के घुसने पर रोक। लाठी डंडों और हथियार से भरे वाहनों पर रोक। ईंट, पत्थर, एसिड, पेट्रोल जमा करने पर प्रतिबंध। दिल्ली की सभी सीमाओं पर सुरक्षा जांच अनिवार्य भडक़ाऊ नारे और पोस्टर लगाने पर रोक। बगैर अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल प्रतिबंधित। ड्यूटी पर जा रहे सरकार कर्मचारियों को प्रतिबंधों से छूट। (bbc.com/hindi)