देवगवां पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि, सचिव पर मनमानी का आरोप:पुरानी सड़क मरम्मत में फर्जीवाड़े से ग्रामीण आक्रोशित

सीधी जिले के सिहावल विकासखंड की ग्राम पंचायत देवगवां इन दिनों विवादों में है। ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि और सचिव पर मनमानी तथा विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समस्याओं के समाधान की बजाय मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, भनमार गांव में करीब 10 साल पहले बनी पीसीसी सड़क अच्छी स्थिति में थी। इसके बावजूद, बिना किसी तकनीकी जांच या आवश्यकता के उस पर मुरम डालकर मरम्मत के नाम पर कथित तौर पर गड़बड़ी की जा रही है। जब ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाया तो सरपंच प्रतिनिधि ने उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। ग्रामीण रामजी सिंह चंदेल, प्रशांत सिंह और शैलेंद्र पाठक ने शनिवार को आरोप लगाया कि सरपंच प्रतिनिधि और सचिव की मिलीभगत से पंचायत के विकास कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि पुराने कार्यों को नए नाम से दिखाकर फर्जी खर्च दर्शाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सवाल उठाने पर उन्हें दबाने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में पंचायत सचिव इंद्र बहादुर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि पुरानी सड़क चलने लायक नहीं थी, इसलिए मरम्मत का कार्य कराया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि सड़क में कोई बड़ी खराबी नहीं थी और यह कार्य केवल फर्जी बिल बनाने के उद्देश्य से किया गया है। ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि जवाबदेही से बचते हैं, तो भ्रष्टाचार बढ़ता है। ग्रामीणों को अब न्याय की उम्मीद है।

देवगवां पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि, सचिव पर मनमानी का आरोप:पुरानी सड़क मरम्मत में फर्जीवाड़े से ग्रामीण आक्रोशित
सीधी जिले के सिहावल विकासखंड की ग्राम पंचायत देवगवां इन दिनों विवादों में है। ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि और सचिव पर मनमानी तथा विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समस्याओं के समाधान की बजाय मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, भनमार गांव में करीब 10 साल पहले बनी पीसीसी सड़क अच्छी स्थिति में थी। इसके बावजूद, बिना किसी तकनीकी जांच या आवश्यकता के उस पर मुरम डालकर मरम्मत के नाम पर कथित तौर पर गड़बड़ी की जा रही है। जब ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाया तो सरपंच प्रतिनिधि ने उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। ग्रामीण रामजी सिंह चंदेल, प्रशांत सिंह और शैलेंद्र पाठक ने शनिवार को आरोप लगाया कि सरपंच प्रतिनिधि और सचिव की मिलीभगत से पंचायत के विकास कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि पुराने कार्यों को नए नाम से दिखाकर फर्जी खर्च दर्शाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सवाल उठाने पर उन्हें दबाने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में पंचायत सचिव इंद्र बहादुर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि पुरानी सड़क चलने लायक नहीं थी, इसलिए मरम्मत का कार्य कराया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि सड़क में कोई बड़ी खराबी नहीं थी और यह कार्य केवल फर्जी बिल बनाने के उद्देश्य से किया गया है। ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि जवाबदेही से बचते हैं, तो भ्रष्टाचार बढ़ता है। ग्रामीणों को अब न्याय की उम्मीद है।