सच्ची कलाएं सही रास्ता दिखाती हैं:अभिव्यक्ति कला मंच के नाट्य शिविर का समापन; इंटरनेट, टीवी के जरिए छद्म कलाएं परोसी जा रहीं

अभिव्यक्ति कलामंच द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन युवा और बाल रंग शिविर का मानस भवन में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर बच्चों ने जनगीत, बुंदेली लोक नृत्य 'कर्मा' और भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध नाटक 'अंधेर नगरी' का जीवंत मंचन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। समापन समारोह में उपस्थित कला विशेषज्ञों ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास में थिएटर के महत्व को रेखांकित किया और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। शिविर के समापन मौके पर बच्चों ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। शुरुआत में बच्चों द्वारा तैयार किए गए दो जनगीतों और बुंदेली लोक नृत्य 'कर्मा' की शानदार प्रस्तुति दी गई। बच्चों ने मंच पर अपने गायन और नृत्य से समां बांध दिया। इसके बाद भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखित नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन अनिल दुबे ने किया। बच्चों की बेहतरीन अभिनय कला देखकर मानस भवन में मौजूद अभिभावकों, दोस्तों और कलाप्रेमियों ने जमकर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। इंटरनेट पर परोसी जा रही छद्म कलाएं: पंकज दीक्षित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे चित्रकार पंकज दीक्षित ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान दौर पर चिंता जताते हुए कहा, "आज के समय में बच्चों और बड़ों के लिए कला को समझना कठिन हो गया है। इंटरनेट और टीवी के जरिए लगातार छद्म कलाएं परोसी जा रही हैं, जो निश्चित तौर पर सही रास्ता नहीं दिखातीं। ये उन चमचमाती मीनारों की तरह हैं जो हमें आकर्षित तो करती हैं, लेकिन उनमें ऐसा कुछ नहीं बचता जिसका हम जीवन में उपयोग कर सकें। सच्ची कला हमें परेशान करती है, संघर्ष कराती है, लेकिन सही रास्ता भी स्पष्ट करती है।" थिएटर जीवनभर के लिए तैयार करता है आधार नाट्यकर्मी और कवि हरिओम राजौरिया ने भी शिविर और रंगकर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि थिएटर बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने और उसे बनाने में एक आधारभूत काम करता है। इस तरह के शिविरों में बच्चे जो कुछ भी सीखते हैं, वह उम्र भर उनके काम आता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। इन कलाकारों का रहा सहयोग, बंटे प्रमाणपत्र बच्चों के शानदार प्रदर्शन के बाद विशेष अतिथि प्रशांत व्यास (संचालक, ड्रीम इंडिया स्कूल) द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाणपत्र भेंट किए गए। उन्होंने भी बच्चों की कला की सराहना की। इस आयोजन को सफल बनाने में अशोकनगर से आईं रामदुलारी शर्मा, रतनलाल पटेल, उज्जैन से मुकेश बिजौले सहित गुना के दिनेश औदिच्य, राजकुमार जैन और मुखौटा कला मंच के साथियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन शिविर संयोजक कृष्णा दुबे ने किया, जबकि आभार सचिव पूजा सिंह ने व्यक्त किया।

सच्ची कलाएं सही रास्ता दिखाती हैं:अभिव्यक्ति कला मंच के नाट्य शिविर का समापन; इंटरनेट, टीवी के जरिए छद्म कलाएं परोसी जा रहीं
अभिव्यक्ति कलामंच द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन युवा और बाल रंग शिविर का मानस भवन में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर बच्चों ने जनगीत, बुंदेली लोक नृत्य 'कर्मा' और भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध नाटक 'अंधेर नगरी' का जीवंत मंचन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। समापन समारोह में उपस्थित कला विशेषज्ञों ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास में थिएटर के महत्व को रेखांकित किया और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। शिविर के समापन मौके पर बच्चों ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। शुरुआत में बच्चों द्वारा तैयार किए गए दो जनगीतों और बुंदेली लोक नृत्य 'कर्मा' की शानदार प्रस्तुति दी गई। बच्चों ने मंच पर अपने गायन और नृत्य से समां बांध दिया। इसके बाद भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखित नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन अनिल दुबे ने किया। बच्चों की बेहतरीन अभिनय कला देखकर मानस भवन में मौजूद अभिभावकों, दोस्तों और कलाप्रेमियों ने जमकर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। इंटरनेट पर परोसी जा रही छद्म कलाएं: पंकज दीक्षित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे चित्रकार पंकज दीक्षित ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान दौर पर चिंता जताते हुए कहा, "आज के समय में बच्चों और बड़ों के लिए कला को समझना कठिन हो गया है। इंटरनेट और टीवी के जरिए लगातार छद्म कलाएं परोसी जा रही हैं, जो निश्चित तौर पर सही रास्ता नहीं दिखातीं। ये उन चमचमाती मीनारों की तरह हैं जो हमें आकर्षित तो करती हैं, लेकिन उनमें ऐसा कुछ नहीं बचता जिसका हम जीवन में उपयोग कर सकें। सच्ची कला हमें परेशान करती है, संघर्ष कराती है, लेकिन सही रास्ता भी स्पष्ट करती है।" थिएटर जीवनभर के लिए तैयार करता है आधार नाट्यकर्मी और कवि हरिओम राजौरिया ने भी शिविर और रंगकर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि थिएटर बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने और उसे बनाने में एक आधारभूत काम करता है। इस तरह के शिविरों में बच्चे जो कुछ भी सीखते हैं, वह उम्र भर उनके काम आता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। इन कलाकारों का रहा सहयोग, बंटे प्रमाणपत्र बच्चों के शानदार प्रदर्शन के बाद विशेष अतिथि प्रशांत व्यास (संचालक, ड्रीम इंडिया स्कूल) द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाणपत्र भेंट किए गए। उन्होंने भी बच्चों की कला की सराहना की। इस आयोजन को सफल बनाने में अशोकनगर से आईं रामदुलारी शर्मा, रतनलाल पटेल, उज्जैन से मुकेश बिजौले सहित गुना के दिनेश औदिच्य, राजकुमार जैन और मुखौटा कला मंच के साथियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन शिविर संयोजक कृष्णा दुबे ने किया, जबकि आभार सचिव पूजा सिंह ने व्यक्त किया।