अयोध्या ही नहीं अपितु भारत वर्ष में बाबर के नाम से कोई भी मस्जिद नहीं बनने देंगे-प्रवीण तोगडिय़ा
अयोध्या ही नहीं अपितु भारत वर्ष में बाबर के नाम से कोई भी मस्जिद नहीं बनने देंगे-प्रवीण तोगडिय़ा
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद,18 मार्च। शुक्रवार को सर्व हिंदू समाज महासमुंद के तत्वावधान में आयोजित विशाल सभा को अंतर राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने राम जन्मभूमि का लगभग 500 वर्षों के संघर्ष का इतिहास संक्षेप में बताया और उसको बनाने के लिए किए गए संघर्ष एवं कार्य योजना का कदम दर कदम योजना पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती पूजा के बाद दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रस्तावना का उद्बोधन करते हुए देवेंद्र दुबे ने छत्तीसगढ़ एवं महासमुंद जिले में धर्मांतरण के विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रलय थीटे ने किया। उन्होंने प्रवीण भाई तोगडिय़ा का जीवन परिचय बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने कहा कि दुनिया भर में इसराइल के संघर्ष की 2000 साल के इतिहास को छोडक़र राम जन्मभूमि के 500 साल की रक्त रंजित संघर्ष का इतिहास कहीं नहीं मिलता। हिंदू दुर्बल एवं कायर होता है ऐसा दुष्प्रचार हिंदुओं को निर्बल बनाने के लिए ही किया जाता रहा। जबकि हिंदू सर्वाधिक बलशाली होता है। हिंदू आज तक होलिका को नहीं भूले। 17 लाख साल पुरानी मां सीता की अपहरण का अपमान हिंदू नहीं भूला। इसलिए प्रतिवर्ष उस अपहरण करनेवाले रावण को याद कर उनका पुतला दहन हम करते हैं। सन 1558 के बाद बाबर के राज्य में राम मंदिर के विध्वंस को नहीं भूले। इसलिए मंदिर बनने तक मंदिर बनाने का संकल्प भी हमने नहीं छोड़ा। इस्लाम के आने से पहले मध्य पूर्व अरब तक हिंदुओं का राज्य था। अरब के बाबर और अहमद शाह अब्दाली मेरे ही कुल के वंशज थे। लेकिन उनके पूर्वजों ने मेरा धर्म छोड़ा इसलिए बाबर और अब्दाली हमारे दुश्मन थे। बाबर का नामोनिशान मिटाने के लिए मैं निकला।
राम मंदिर आंदोलन की इतिहास का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण गर्भ ग्रह में बने एवं बाबर का मस्जिद अयोध्या की सीमा ही नहीं अपितु भारत वर्ष में बाबर के नाम से कोई भी मस्जिद नहीं बनने देंगे। इस संकल्पना के साथ 6 दिसंबर 1992 को बाबर के ढांचे को मिटाया। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के कवर्धा में साद राम यादव एक हिंदू बेटे का सर तन से जुदा को कभी भी माफ नहीं किया जा सकता। अब तो हिंदू ही आगे, समृद्ध हिंदू, संरक्षित हिंदू,सम्मान युक्त हिंदू ही भविष्य में मेरे जीवन का लक्ष्य रहेगा।
सभा के अंत में सर्व हिंदू समाज के भरत चंद्राकर ने आभार व्यक्त करते हुए इस संगठन की स्थापना का उद्देश्य एवं कार्य प्रणाली पर प्रकाश डाला। इस संगठन ने अब तक 150 से भी अधिक परिवारों का घर वापसी कराया है। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अभ्युदय संस्थान के संचालक राजन शर्मा, रविदास समाज के गुरु संतोष रात्रे, अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रांत महामंत्री दीपक दुबे, बेटू चंदेल, राहुल वाडिया, महेंद्र साव, नगर पुरोहित पंकज महाराज, सर्व हिंदू समाज के देवेंद्र दुबे, हुकुमचंद शर्मा, आर एस चंद्राकर, हेमन्त तिवारी, बिपिन बिहारी मोहंती, देवनारायण बिसेन, भरत चंद्राकर, उमेश जैन, आनंद साहू, उत्तम वर्मा, सुमन सेंद्रे, ईवन साहू, नरेश नायक, संजय यादव, मनीष चंद्राकर, नितेश श्रीवास्तव, कान्हा प्रधान, सुनील, बुद्धेश्वर सोनवानी, प्रमोद चंद्राकर, शिवम ठाकुर, ताराचंद चांडक, उमेश कोचर, आलोक दुबे, गौकरण साहू, अखिलेश लूनिया, भुनेश्वर साहू, देवेंद्र चंद्राकर, श्रीकांत नाशरे, परमेश्वर, सुरेन्द्र महाराज, कोसरंगी गुरुकुल के आचार्य मुकेश एवं उनके ब्रह्मचारी साथी, पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य, विभिन्न समाजों के समाज प्रमुख एवं पदाधिकारी, शहर के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद,18 मार्च। शुक्रवार को सर्व हिंदू समाज महासमुंद के तत्वावधान में आयोजित विशाल सभा को अंतर राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने राम जन्मभूमि का लगभग 500 वर्षों के संघर्ष का इतिहास संक्षेप में बताया और उसको बनाने के लिए किए गए संघर्ष एवं कार्य योजना का कदम दर कदम योजना पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती पूजा के बाद दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रस्तावना का उद्बोधन करते हुए देवेंद्र दुबे ने छत्तीसगढ़ एवं महासमुंद जिले में धर्मांतरण के विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रलय थीटे ने किया। उन्होंने प्रवीण भाई तोगडिय़ा का जीवन परिचय बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने कहा कि दुनिया भर में इसराइल के संघर्ष की 2000 साल के इतिहास को छोडक़र राम जन्मभूमि के 500 साल की रक्त रंजित संघर्ष का इतिहास कहीं नहीं मिलता। हिंदू दुर्बल एवं कायर होता है ऐसा दुष्प्रचार हिंदुओं को निर्बल बनाने के लिए ही किया जाता रहा। जबकि हिंदू सर्वाधिक बलशाली होता है। हिंदू आज तक होलिका को नहीं भूले। 17 लाख साल पुरानी मां सीता की अपहरण का अपमान हिंदू नहीं भूला। इसलिए प्रतिवर्ष उस अपहरण करनेवाले रावण को याद कर उनका पुतला दहन हम करते हैं। सन 1558 के बाद बाबर के राज्य में राम मंदिर के विध्वंस को नहीं भूले। इसलिए मंदिर बनने तक मंदिर बनाने का संकल्प भी हमने नहीं छोड़ा। इस्लाम के आने से पहले मध्य पूर्व अरब तक हिंदुओं का राज्य था। अरब के बाबर और अहमद शाह अब्दाली मेरे ही कुल के वंशज थे। लेकिन उनके पूर्वजों ने मेरा धर्म छोड़ा इसलिए बाबर और अब्दाली हमारे दुश्मन थे। बाबर का नामोनिशान मिटाने के लिए मैं निकला।
राम मंदिर आंदोलन की इतिहास का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण गर्भ ग्रह में बने एवं बाबर का मस्जिद अयोध्या की सीमा ही नहीं अपितु भारत वर्ष में बाबर के नाम से कोई भी मस्जिद नहीं बनने देंगे। इस संकल्पना के साथ 6 दिसंबर 1992 को बाबर के ढांचे को मिटाया। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के कवर्धा में साद राम यादव एक हिंदू बेटे का सर तन से जुदा को कभी भी माफ नहीं किया जा सकता। अब तो हिंदू ही आगे, समृद्ध हिंदू, संरक्षित हिंदू,सम्मान युक्त हिंदू ही भविष्य में मेरे जीवन का लक्ष्य रहेगा।
सभा के अंत में सर्व हिंदू समाज के भरत चंद्राकर ने आभार व्यक्त करते हुए इस संगठन की स्थापना का उद्देश्य एवं कार्य प्रणाली पर प्रकाश डाला। इस संगठन ने अब तक 150 से भी अधिक परिवारों का घर वापसी कराया है। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अभ्युदय संस्थान के संचालक राजन शर्मा, रविदास समाज के गुरु संतोष रात्रे, अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रांत महामंत्री दीपक दुबे, बेटू चंदेल, राहुल वाडिया, महेंद्र साव, नगर पुरोहित पंकज महाराज, सर्व हिंदू समाज के देवेंद्र दुबे, हुकुमचंद शर्मा, आर एस चंद्राकर, हेमन्त तिवारी, बिपिन बिहारी मोहंती, देवनारायण बिसेन, भरत चंद्राकर, उमेश जैन, आनंद साहू, उत्तम वर्मा, सुमन सेंद्रे, ईवन साहू, नरेश नायक, संजय यादव, मनीष चंद्राकर, नितेश श्रीवास्तव, कान्हा प्रधान, सुनील, बुद्धेश्वर सोनवानी, प्रमोद चंद्राकर, शिवम ठाकुर, ताराचंद चांडक, उमेश कोचर, आलोक दुबे, गौकरण साहू, अखिलेश लूनिया, भुनेश्वर साहू, देवेंद्र चंद्राकर, श्रीकांत नाशरे, परमेश्वर, सुरेन्द्र महाराज, कोसरंगी गुरुकुल के आचार्य मुकेश एवं उनके ब्रह्मचारी साथी, पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य, विभिन्न समाजों के समाज प्रमुख एवं पदाधिकारी, शहर के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।