एप्रोच सडक़ बही, सैकड़ों ग्रामीणों का मुख्यालय से संपर्क टूटा
एप्रोच सडक़ बही, सैकड़ों ग्रामीणों का मुख्यालय से संपर्क टूटा
कमर तक पानी में नाला पार करने को मजबूर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजपुर,17 जुलाई। बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ से जिगड़ी को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग पर कोदो कुमनी नाला के पास बनाई गई एप्रोच सडक़ तेज बारिश में बह जाने से करीब 500 ग्रामीणों का मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कमर तक पानी में डंडे के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं। गुरुवार को एक एंबुलेंस भी रास्ता बंद होने के कारण मरीज तक नहीं पहुंच सकी।
ग्रामीणों ने बताया कि माकड़ गांव राजपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है। जिगड़ी-माकड़ पहुंच मार्ग पर कोदो कुमनी नाला में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण जलस्तर बढ़ गया है। निर्माणाधीन पुल के दौरान आवागमन के लिए बनाई गई अस्थायी अप्रोच सडक़ भी पानी के तेज बहाव में बह गई, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बैंक, अस्पताल, तहसील, बाजार सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यही एकमात्र मार्ग है। पानी में उतरने से पहले डंडे से गहराई और पत्थरों का अंदाजा लगाना पड़ता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। कई ग्रामीण बाइक को कंधे पर उठाकर नाला पार कर रहे हैं ताकि दूध, सब्जी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान ला सकें।
इस संबंध में बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा, आपके माध्यम से जानकारी मिली है कि किस विभाग से पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। वहां की वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर मामले को दिखवाती हूं।
जानकारी के अनुसार जिगड़ी-माकड़ मार्ग पर कोदो कुमनी नाला में लगभग 80 मीटर लंबे उच्चस्तरीय पुल का निर्माण 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग, अंबिकापुर द्वारा कराया जा रहा है। पुल निर्माण को 25 जुलाई 2025 को प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। कार्यादेश 2 मार्च 2026 को जारी किया गया, जबकि निर्माण पूर्ण करने की समय-सीमा 31 जनवरी 2027 निर्धारित है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण के दौरान विभाग और ठेकेदार ने सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की। यदि मजबूत डायवर्जन या अस्थायी मार्ग बनाया जाता तो गांव का संपर्क नहीं टूटता।
भाजपा मंडल महामंत्री संतोष तिवारी ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि गुरुवार सुबह निरीक्षण के दौरान आवागमन के लिए कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिला और अप्रोच मार्ग पूरी तरह बह चुका था।
उन्होंने बताया कि एक बीमार मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस भी रास्ता बंद होने के कारण वापस लौट गई। सेतु विभाग के इंजीनियर ने जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन देर शाम तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
कमर तक पानी में नाला पार करने को मजबूर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजपुर,17 जुलाई। बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ से जिगड़ी को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग पर कोदो कुमनी नाला के पास बनाई गई एप्रोच सडक़ तेज बारिश में बह जाने से करीब 500 ग्रामीणों का मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कमर तक पानी में डंडे के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं। गुरुवार को एक एंबुलेंस भी रास्ता बंद होने के कारण मरीज तक नहीं पहुंच सकी।
ग्रामीणों ने बताया कि माकड़ गांव राजपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है। जिगड़ी-माकड़ पहुंच मार्ग पर कोदो कुमनी नाला में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण जलस्तर बढ़ गया है। निर्माणाधीन पुल के दौरान आवागमन के लिए बनाई गई अस्थायी अप्रोच सडक़ भी पानी के तेज बहाव में बह गई, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बैंक, अस्पताल, तहसील, बाजार सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यही एकमात्र मार्ग है। पानी में उतरने से पहले डंडे से गहराई और पत्थरों का अंदाजा लगाना पड़ता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। कई ग्रामीण बाइक को कंधे पर उठाकर नाला पार कर रहे हैं ताकि दूध, सब्जी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान ला सकें।
इस संबंध में बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा, आपके माध्यम से जानकारी मिली है कि किस विभाग से पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। वहां की वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर मामले को दिखवाती हूं।
जानकारी के अनुसार जिगड़ी-माकड़ मार्ग पर कोदो कुमनी नाला में लगभग 80 मीटर लंबे उच्चस्तरीय पुल का निर्माण 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग, अंबिकापुर द्वारा कराया जा रहा है। पुल निर्माण को 25 जुलाई 2025 को प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। कार्यादेश 2 मार्च 2026 को जारी किया गया, जबकि निर्माण पूर्ण करने की समय-सीमा 31 जनवरी 2027 निर्धारित है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण के दौरान विभाग और ठेकेदार ने सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की। यदि मजबूत डायवर्जन या अस्थायी मार्ग बनाया जाता तो गांव का संपर्क नहीं टूटता।
भाजपा मंडल महामंत्री संतोष तिवारी ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि गुरुवार सुबह निरीक्षण के दौरान आवागमन के लिए कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिला और अप्रोच मार्ग पूरी तरह बह चुका था।
उन्होंने बताया कि एक बीमार मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस भी रास्ता बंद होने के कारण वापस लौट गई। सेतु विभाग के इंजीनियर ने जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन देर शाम तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।