एसईसीएल प्रबंधन के प्रयासों को सराहा

छत्तीसगढ़ संवाददाता सूरजपुर, 23 फरवरी। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में 20 से 23 फरवरी तक आयोजित दक्षिण पूर्वी कोयला परिक्षेत्र (एसईसीएल) के राष्ट्रीय मीडिया प्रेस टूर कार्यक्रम के तहत विभिन्न मीडिया संस्थानों के करीब डेढ़ दर्जन प्रतिनिधियों ने रविवार को बिश्रामपुर क्षेत्र का दौरा किया। क्षेत्रीय महाप्रबंधक डॉ. संजय सिंह एवं जीएम ऑपरेशन जी.के. रॉय के नेतृत्व में मीडिया टीम ने एसईसीएल के माइंस क्लोजर मद से विकसित केनापारा पर्यटन केंद्र का निरीक्षण किया। यहां उन्हें क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि लगभग सात वर्ष पूर्व इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। परित्यक्त खदान क्षेत्र और क्वारी के अथाह जल को उपयोगी बनाते हुए इसे मत्स्य पालन के साथ पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। पर्यटन केंद्र का संचालन महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। यहां मत्स्य पालन के साथ बोटिंग और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की सुविधा उपलब्ध है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से 50 से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुडक़र आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हैं। मीडिया प्रतिनिधियों ने महिला समूह की सदस्यों से चर्चा कर उनके अनुभव भी जाने तथा क्वारी में बोटिंग का आनंद लिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि चार दशक तक कोयला उत्खनन के बाद बंजर पड़ी भूमि के पुनर्विकास हेतु माइंस क्लोजर मद से अब तक लगभग छह करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। आगामी मार्च में केंद्रीय कोयला मंत्री के प्रस्तावित दौरे से पूर्व इस पर्यटन केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये के अतिरिक्त निर्माण एवं विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इसके पूर्व मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भटगांव क्षेत्र के नवापारा खदान का भी निरीक्षण किया, जहां खदान से निकले जल से लगभग 50 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। यहां भटगांव महाप्रबंधक शरद तिवारी ने विस्तृत जानकारी दी। मीडिया टीम ने बैकुंठपुर स्थित चर्चा आरओ माइंस, जो एसईसीएल की सबसे बड़ी भूमिगत खदान है, का भी दौरा किया। यहां क्षेत्रीय महाप्रबंधक बी.एन. झा ने टीम को सुरक्षा मानकों और कोयला उत्पादन की प्रक्रिया से अवगत कराया। मीडिया प्रतिनिधियों ने खदान बंदी के बाद संसाधनों के पुन: उपयोग और सतत विकास की दिशा में एसईसीएल प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की।

एसईसीएल प्रबंधन के प्रयासों को सराहा
छत्तीसगढ़ संवाददाता सूरजपुर, 23 फरवरी। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में 20 से 23 फरवरी तक आयोजित दक्षिण पूर्वी कोयला परिक्षेत्र (एसईसीएल) के राष्ट्रीय मीडिया प्रेस टूर कार्यक्रम के तहत विभिन्न मीडिया संस्थानों के करीब डेढ़ दर्जन प्रतिनिधियों ने रविवार को बिश्रामपुर क्षेत्र का दौरा किया। क्षेत्रीय महाप्रबंधक डॉ. संजय सिंह एवं जीएम ऑपरेशन जी.के. रॉय के नेतृत्व में मीडिया टीम ने एसईसीएल के माइंस क्लोजर मद से विकसित केनापारा पर्यटन केंद्र का निरीक्षण किया। यहां उन्हें क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि लगभग सात वर्ष पूर्व इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। परित्यक्त खदान क्षेत्र और क्वारी के अथाह जल को उपयोगी बनाते हुए इसे मत्स्य पालन के साथ पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। पर्यटन केंद्र का संचालन महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। यहां मत्स्य पालन के साथ बोटिंग और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की सुविधा उपलब्ध है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से 50 से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुडक़र आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हैं। मीडिया प्रतिनिधियों ने महिला समूह की सदस्यों से चर्चा कर उनके अनुभव भी जाने तथा क्वारी में बोटिंग का आनंद लिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि चार दशक तक कोयला उत्खनन के बाद बंजर पड़ी भूमि के पुनर्विकास हेतु माइंस क्लोजर मद से अब तक लगभग छह करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। आगामी मार्च में केंद्रीय कोयला मंत्री के प्रस्तावित दौरे से पूर्व इस पर्यटन केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये के अतिरिक्त निर्माण एवं विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इसके पूर्व मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भटगांव क्षेत्र के नवापारा खदान का भी निरीक्षण किया, जहां खदान से निकले जल से लगभग 50 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। यहां भटगांव महाप्रबंधक शरद तिवारी ने विस्तृत जानकारी दी। मीडिया टीम ने बैकुंठपुर स्थित चर्चा आरओ माइंस, जो एसईसीएल की सबसे बड़ी भूमिगत खदान है, का भी दौरा किया। यहां क्षेत्रीय महाप्रबंधक बी.एन. झा ने टीम को सुरक्षा मानकों और कोयला उत्पादन की प्रक्रिया से अवगत कराया। मीडिया प्रतिनिधियों ने खदान बंदी के बाद संसाधनों के पुन: उपयोग और सतत विकास की दिशा में एसईसीएल प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की।