ओरछा में 151 बच्चों का हुआ सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार:वैदिक परंपराओं के साथ बेतवा तट पर हुआ मुंडन, राम राजा दरबार के किए दर्शन

निवाड़ी की पवित्र नगरी ओरछा में बसंत पंचमी के मौके पर 151 बच्चों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। नवीन कनक भवन में हुआ यह कार्यक्रम सनातन धर्म की परंपराओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से लगातार दूसरे साल आयोजित किया गया। बेतवा नदी के तट पर हुआ मुंडन संस्कार इस भव्य समारोह की शुरुआत शुक्रवार सुबह बेतवा नदी के पवित्र तट पर बच्चों के मुंडन संस्कार से हुई। वैदिक विधि-विधान से बच्चों का मुंडन कराया गया, जिसे शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मुंडन के उपरांत बच्चों को दूध, दही, घी, गौमूत्र, शक्कर और शहद सहित अन्य पवित्र तत्वों से पारंपरिक 'दश स्नान' कराया गया। इसके बाद उन्हें धोती, गमछा, माला और तिलक के साथ 'ब्रह्मचर्य रूप' में तैयार किया गया। बच्चों को विधिवत जनेऊ का पूजन कर यज्ञोपवीत धारण कराया तैयार होने के बाद बच्चों को विधिवत जनेऊ का पूजन कर यज्ञोपवीत धारण कराया गया। भावानल पीठ के जगद्गुरु ने बच्चों को गायत्री मंत्र और वेदांचल दीक्षा प्रदान की, जो उन्हें धर्म, शिक्षा और संयम के मार्ग से जोड़ती है। संस्कार के बाद सभी बच्चों ने राम राजा सरकार के दरबार में दर्शन किए, जिसके बाद एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। आयोजन समिति ने बताया कि इस वर्ष कुल 151 बच्चों ने पंजीकरण कराया था। स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और अभिभावकों की उपस्थिति से पूरे वातावरण में धार्मिक उत्साह देखने को मिला।

ओरछा में 151 बच्चों का हुआ सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार:वैदिक परंपराओं के साथ बेतवा तट पर हुआ मुंडन, राम राजा दरबार के किए दर्शन
निवाड़ी की पवित्र नगरी ओरछा में बसंत पंचमी के मौके पर 151 बच्चों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। नवीन कनक भवन में हुआ यह कार्यक्रम सनातन धर्म की परंपराओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से लगातार दूसरे साल आयोजित किया गया। बेतवा नदी के तट पर हुआ मुंडन संस्कार इस भव्य समारोह की शुरुआत शुक्रवार सुबह बेतवा नदी के पवित्र तट पर बच्चों के मुंडन संस्कार से हुई। वैदिक विधि-विधान से बच्चों का मुंडन कराया गया, जिसे शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मुंडन के उपरांत बच्चों को दूध, दही, घी, गौमूत्र, शक्कर और शहद सहित अन्य पवित्र तत्वों से पारंपरिक 'दश स्नान' कराया गया। इसके बाद उन्हें धोती, गमछा, माला और तिलक के साथ 'ब्रह्मचर्य रूप' में तैयार किया गया। बच्चों को विधिवत जनेऊ का पूजन कर यज्ञोपवीत धारण कराया तैयार होने के बाद बच्चों को विधिवत जनेऊ का पूजन कर यज्ञोपवीत धारण कराया गया। भावानल पीठ के जगद्गुरु ने बच्चों को गायत्री मंत्र और वेदांचल दीक्षा प्रदान की, जो उन्हें धर्म, शिक्षा और संयम के मार्ग से जोड़ती है। संस्कार के बाद सभी बच्चों ने राम राजा सरकार के दरबार में दर्शन किए, जिसके बाद एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। आयोजन समिति ने बताया कि इस वर्ष कुल 151 बच्चों ने पंजीकरण कराया था। स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और अभिभावकों की उपस्थिति से पूरे वातावरण में धार्मिक उत्साह देखने को मिला।