उज्जैन में किसान सांसद-विधायक के घर ढोल लेकर पहुंचे:लैंड पुलिंग के विरोध में प्रदर्शन, चेतावनी दी- हजारों किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे

सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता उत्तर विधानसभा के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया के घरों पर ढोल लेकर पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों को दोनों जनप्रतिनिधियों के घरों के गेट पर चस्पा कर प्रदर्शन किया। जनप्रतिनिधियों के घरों पर प्रदर्शन के बाद किसान संघ ने कलेक्टर कार्यालय पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। किसान बोले- सरकार लैंड पुलिंग के नाम पर जमीन छीन रही भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बहादुरसिंह आंजना ने बताया कि सिंहस्थ भूमि पर स्थायी निर्माण के नाम पर सरकार लैंड पुलिंग नीति लागू कर रही है, जिसका किसान संघ लगातार विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अब नए तरीके से किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है। सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे किसान रैली के रूप में दशहरा मैदान से रवाना हुए और सबसे पहले विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के घर पहुंचे।यहां किसानों ने नारेबाजी करते हुए लैंड पुलिंग के विरोध में मांगपत्र गेट पर चस्पा किया। इसके बाद किसान संघ के कार्यकर्ता सेठी नगर स्थित सांसद अनिल फिरोजिया के घर पहुंचे और वहां भी मांगपत्र चस्पा कर विरोध प्रदर्शन किया। ढोल लेकर पहुंचे किसान, कानून निरस्त करने की मांग किसान संघ ने सिंहस्थ क्षेत्र में पक्के और व्यावसायिक निर्माण के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित करने वाले कानून को निरस्त करने की मांग की। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने पहुंचे किसानों ने अपने साथ ढोल भी लाए और विधायक व सांसद के घरों पर ढोल बजाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदेशाध्यक्ष कमलसिंह आंजना ने बताया कि सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। यदि इस दौरान कानून निरस्त नहीं किया गया, तो 18 नवंबर से किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे। उन्होंने कहा कि “अगर किसानों ने एक बार उज्जैन में डेरा डाल दिया, तो सरकार का स्पष्ट निर्णय आने तक नहीं हटेंगे।” इस आंदोलन में मातृशक्ति भी सड़कों पर उतरने को तैयार है। 18 नवंबर से हजारों किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे किसान संघ के अनुसार, मालवा प्रांत के 15 जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। सभी जिला मुख्यालयों पर किसान संघ के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपेंगे। एक सप्ताह की अवधि पूरी होने के बाद भी यदि कानून निरस्त नहीं हुआ, तो 18 नवंबर को हजारों किसान उज्जैन में डेरा डाल देंगे।

उज्जैन में किसान सांसद-विधायक के घर ढोल लेकर पहुंचे:लैंड पुलिंग के विरोध में प्रदर्शन, चेतावनी दी- हजारों किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे
सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता उत्तर विधानसभा के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया के घरों पर ढोल लेकर पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों को दोनों जनप्रतिनिधियों के घरों के गेट पर चस्पा कर प्रदर्शन किया। जनप्रतिनिधियों के घरों पर प्रदर्शन के बाद किसान संघ ने कलेक्टर कार्यालय पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। किसान बोले- सरकार लैंड पुलिंग के नाम पर जमीन छीन रही भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बहादुरसिंह आंजना ने बताया कि सिंहस्थ भूमि पर स्थायी निर्माण के नाम पर सरकार लैंड पुलिंग नीति लागू कर रही है, जिसका किसान संघ लगातार विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अब नए तरीके से किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है। सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे किसान रैली के रूप में दशहरा मैदान से रवाना हुए और सबसे पहले विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के घर पहुंचे।यहां किसानों ने नारेबाजी करते हुए लैंड पुलिंग के विरोध में मांगपत्र गेट पर चस्पा किया। इसके बाद किसान संघ के कार्यकर्ता सेठी नगर स्थित सांसद अनिल फिरोजिया के घर पहुंचे और वहां भी मांगपत्र चस्पा कर विरोध प्रदर्शन किया। ढोल लेकर पहुंचे किसान, कानून निरस्त करने की मांग किसान संघ ने सिंहस्थ क्षेत्र में पक्के और व्यावसायिक निर्माण के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित करने वाले कानून को निरस्त करने की मांग की। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने पहुंचे किसानों ने अपने साथ ढोल भी लाए और विधायक व सांसद के घरों पर ढोल बजाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदेशाध्यक्ष कमलसिंह आंजना ने बताया कि सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। यदि इस दौरान कानून निरस्त नहीं किया गया, तो 18 नवंबर से किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे। उन्होंने कहा कि “अगर किसानों ने एक बार उज्जैन में डेरा डाल दिया, तो सरकार का स्पष्ट निर्णय आने तक नहीं हटेंगे।” इस आंदोलन में मातृशक्ति भी सड़कों पर उतरने को तैयार है। 18 नवंबर से हजारों किसान उज्जैन में डेरा डालेंगे किसान संघ के अनुसार, मालवा प्रांत के 15 जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। सभी जिला मुख्यालयों पर किसान संघ के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपेंगे। एक सप्ताह की अवधि पूरी होने के बाद भी यदि कानून निरस्त नहीं हुआ, तो 18 नवंबर को हजारों किसान उज्जैन में डेरा डाल देंगे।