कोटेश्वर धाम में एमपी-छत्तीसगढ़ से पहुंचे श्रद्धालु:सावन के पहले सोमवार पर भक्तों ने किया जलाभिषेक और पूजा-अर्चना

सावन के पहले सोमवार पर बालाघाट के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव का पूजन अत्यंत लाभकारी और फलदायक होता है, जिसके चलते शिवभक्त इस महीने विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मुख्यालय स्थित वैनगंगा नदी के तट पर बने शिव मंदिर, बुढ़ी शिव मंदिर, मोती नगर शिव मंदिर, श्री शिव सांई मंदिर और सिद्ध लिंगेश्वर मंदिर लिंगा में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। लांजी के प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करने पहुंचे। मंदिरों से कोटेश्वर धाम तक लगी कतारें भगवान शिव के 108 लिंगों में से एक लांजी का कोटेश्वर धाम अपनी ऐतिहासिकता और सिद्धस्थल के लिए विख्यात है। सावन मास में यहां केवल जिले से ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी शिवभक्त कोटेश्वर शिवलिंग का पूजन करने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान कोटेश्वर महादेव की भक्ति भाव से आराधना, पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी कारण कोटेश्वर धाम में वर्षभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। सावन के पहले सोमवार को भी सैकड़ों शिवभक्तों ने भगवान कोटेश्वर महादेव को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कोटेश्वर धाम में एमपी-छत्तीसगढ़ से पहुंचे श्रद्धालु:सावन के पहले सोमवार पर भक्तों ने किया जलाभिषेक और पूजा-अर्चना
सावन के पहले सोमवार पर बालाघाट के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव का पूजन अत्यंत लाभकारी और फलदायक होता है, जिसके चलते शिवभक्त इस महीने विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मुख्यालय स्थित वैनगंगा नदी के तट पर बने शिव मंदिर, बुढ़ी शिव मंदिर, मोती नगर शिव मंदिर, श्री शिव सांई मंदिर और सिद्ध लिंगेश्वर मंदिर लिंगा में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। लांजी के प्रसिद्ध कोटेश्वर धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करने पहुंचे। मंदिरों से कोटेश्वर धाम तक लगी कतारें भगवान शिव के 108 लिंगों में से एक लांजी का कोटेश्वर धाम अपनी ऐतिहासिकता और सिद्धस्थल के लिए विख्यात है। सावन मास में यहां केवल जिले से ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी शिवभक्त कोटेश्वर शिवलिंग का पूजन करने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान कोटेश्वर महादेव की भक्ति भाव से आराधना, पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी कारण कोटेश्वर धाम में वर्षभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। सावन के पहले सोमवार को भी सैकड़ों शिवभक्तों ने भगवान कोटेश्वर महादेव को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।