ग़ुलाम नबी आज़ाद और उमर अब्दुल्ला के बीच सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एक इंटरव्यू में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को पता था कि अनुच्छेद 370 ख़त्म होने वाला है और उन्होंने ही केंद्र सरकार से कहा कि हमें नज़रबंद कर दिया जाए ताकि आम लोगों के बीच जाकर स्टैंड ना लेना पड़े. इस आरोप पर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें आठ महीने तक घर में बंद रखा गया जबकि ग़ुलाम नबी आज़ाद अकेले ऐसे जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम थे जिन्हें नज़रबंद नहीं किया गया. उन्होंने आज़ाद के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, वो ग़ुलाम नबी आज़ाद कहां गए जो साल 2015 तक हमसे राज्यसभा में सीट की भीख मांग रहे थे. अब्दुल्लाओं को 370 ख़त्म होने की जानकारी थी लेकिन फिर भी हम आठ महीने तक नज़रबंद रहे लेकिन आप आज़ाद रहे. अब्दुल्ला गुपचुप तरीक़े से सरकार से मिलते हैं लेकिन फिर भी मेरे पिता को सरकारी बंगले से निकाला गया और आप को अपने बंगले में रहने दिया गया. अब्दुल्ला दिल्ली में कुछ और कहते हैं और कश्मीर में कुछ और लेकिन फिर भी पीएम राज्यसभा में आपके लिए रोते हैं और हमें हर भाषण में आलोचना मिलती है. हमें पद्म अवॉर्ड नहीं भूलना चाहिए जिसके लिए आपने कांग्रसे छोड़ दी और अब जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं. कौन आज़ाद है और कौन गुलाम...ये समय बताएगा और लोग तय करेंगे. 19 फरवरी को एक न्यूज़ चैनल ने गुलाम नबी आज़ाद का इंटरव्यू चलाया और इसमें उन्होंने अब्दुल्ला परिवार पर जम्मू-कश्मीर की जनता को बेवकूफ़ बनाने के आरोप लगाए.(bbc.com/hindi)

ग़ुलाम नबी आज़ाद और उमर अब्दुल्ला के बीच सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस
ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एक इंटरव्यू में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को पता था कि अनुच्छेद 370 ख़त्म होने वाला है और उन्होंने ही केंद्र सरकार से कहा कि हमें नज़रबंद कर दिया जाए ताकि आम लोगों के बीच जाकर स्टैंड ना लेना पड़े. इस आरोप पर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें आठ महीने तक घर में बंद रखा गया जबकि ग़ुलाम नबी आज़ाद अकेले ऐसे जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम थे जिन्हें नज़रबंद नहीं किया गया. उन्होंने आज़ाद के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, वो ग़ुलाम नबी आज़ाद कहां गए जो साल 2015 तक हमसे राज्यसभा में सीट की भीख मांग रहे थे. अब्दुल्लाओं को 370 ख़त्म होने की जानकारी थी लेकिन फिर भी हम आठ महीने तक नज़रबंद रहे लेकिन आप आज़ाद रहे. अब्दुल्ला गुपचुप तरीक़े से सरकार से मिलते हैं लेकिन फिर भी मेरे पिता को सरकारी बंगले से निकाला गया और आप को अपने बंगले में रहने दिया गया. अब्दुल्ला दिल्ली में कुछ और कहते हैं और कश्मीर में कुछ और लेकिन फिर भी पीएम राज्यसभा में आपके लिए रोते हैं और हमें हर भाषण में आलोचना मिलती है. हमें पद्म अवॉर्ड नहीं भूलना चाहिए जिसके लिए आपने कांग्रसे छोड़ दी और अब जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं. कौन आज़ाद है और कौन गुलाम...ये समय बताएगा और लोग तय करेंगे. 19 फरवरी को एक न्यूज़ चैनल ने गुलाम नबी आज़ाद का इंटरव्यू चलाया और इसमें उन्होंने अब्दुल्ला परिवार पर जम्मू-कश्मीर की जनता को बेवकूफ़ बनाने के आरोप लगाए.(bbc.com/hindi)