राजघाट में सरकारी भूमि पर अवैध वृक्ष कटाई जारी:काटे जा रहे हैं दशकों पुराने पेड़, प्रशासन पर ध्यान ने देने का आरोप

बड़वानी के राजघाट में, जो सरदार सरोवर बांध परियोजना के डूब प्रभावित क्षेत्र में आता है, सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई जारी है। दशकों पुराने इन पेड़ों को दिनदहाड़े काटा जा रहा है, जिससे नर्मदा नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े राहुल यादव और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे के पेड़ों की कटाई से नर्मदा के प्रवाह की गति और जल की शुद्धता (अविरलता और निर्मलता) पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह अवैध गतिविधि न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी खिलवाड़ है। नर्मदा के पौराणिक महत्व और प्रदेशवासियों की आजीविका से जुड़े होने के कारण, प्रदेश सरकार ने इसके संरक्षण हेतु किनारे पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से एक ही दिन में 2 करोड़ पौधे लगाए थे। ऐसे में इस अवैध कटाई पर सरकारी तंत्र की अनदेखी आश्चर्यजनक है। राजघाट निवासी देवेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि सरदार सरोवर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और बरगी जैसे बांधों के कारण पहले ही बड़े पैमाने पर वन विनाश हो चुका है। यदि पेड़ों का सफाया इसी तरह जारी रहा, तो नर्मदा घाटी में 'ग्लोबल वार्मिंग' का खतरा तेजी से बढ़ेगा। हरियाली की कमी से होने वाले सूक्ष्म जलवायु परिवर्तन का नर्मदा घाटी की खेती पर विनाशकारी असर पड़ेगा, जिससे फसलों की उपज घटेगी और किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। किसानों और मछुआरों की आजीविका अनिश्चित होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सोलंकी ने यह भी बताया कि इस गैरकानूनी कटाई में वे लोग भी शामिल हैं जो खुद को नर्मदा का भक्त बताते हैं और नर्मदा जयंती के भंडारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन निजी स्वार्थ के लिए नर्मदा तटों की हरियाली को उजाड़ने में संलिप्त हैं। राजघाट क्षेत्र में दिन-दहाड़े हो रही इस कटाई के बावजूद स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। नर्मदा किनारे की हरियाली और नर्मदा की अविरलता प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इस अवैध पेड़ कटाई के खिलाफ कार्रवाई करना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी है। नर्मदा किनारे की हरियाली का संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और पर्यावरणीय अस्तित्व का आधार है। पेड़-पौधे मनुष्यों के साथ मूक प्राणियों और पक्षियों के जीवन के लिए भी समान रूप से जरूरी है। इसलिए इस अवैध पेड़ कटाई को सख्ती से रोका जाना चाहिए। इस संबंध में बड़वानी वन विभाग रेंज के रेंजर गुलाबसिंह बरड़े से बात की तो उन्होंने बताया कि डूब क्षेत्र है, लकड़ी काटे या पेड़ हमें क्या लेना देना एनवीडीए विभाग देखें। डूब क्षेत्र की जवाबदारी एनवीडीए विभाग की है हमारी नहीं।

राजघाट में सरकारी भूमि पर अवैध वृक्ष कटाई जारी:काटे जा रहे हैं दशकों पुराने पेड़, प्रशासन पर ध्यान ने देने का आरोप
बड़वानी के राजघाट में, जो सरदार सरोवर बांध परियोजना के डूब प्रभावित क्षेत्र में आता है, सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई जारी है। दशकों पुराने इन पेड़ों को दिनदहाड़े काटा जा रहा है, जिससे नर्मदा नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े राहुल यादव और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे के पेड़ों की कटाई से नर्मदा के प्रवाह की गति और जल की शुद्धता (अविरलता और निर्मलता) पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह अवैध गतिविधि न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी खिलवाड़ है। नर्मदा के पौराणिक महत्व और प्रदेशवासियों की आजीविका से जुड़े होने के कारण, प्रदेश सरकार ने इसके संरक्षण हेतु किनारे पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से एक ही दिन में 2 करोड़ पौधे लगाए थे। ऐसे में इस अवैध कटाई पर सरकारी तंत्र की अनदेखी आश्चर्यजनक है। राजघाट निवासी देवेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि सरदार सरोवर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और बरगी जैसे बांधों के कारण पहले ही बड़े पैमाने पर वन विनाश हो चुका है। यदि पेड़ों का सफाया इसी तरह जारी रहा, तो नर्मदा घाटी में 'ग्लोबल वार्मिंग' का खतरा तेजी से बढ़ेगा। हरियाली की कमी से होने वाले सूक्ष्म जलवायु परिवर्तन का नर्मदा घाटी की खेती पर विनाशकारी असर पड़ेगा, जिससे फसलों की उपज घटेगी और किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। किसानों और मछुआरों की आजीविका अनिश्चित होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सोलंकी ने यह भी बताया कि इस गैरकानूनी कटाई में वे लोग भी शामिल हैं जो खुद को नर्मदा का भक्त बताते हैं और नर्मदा जयंती के भंडारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन निजी स्वार्थ के लिए नर्मदा तटों की हरियाली को उजाड़ने में संलिप्त हैं। राजघाट क्षेत्र में दिन-दहाड़े हो रही इस कटाई के बावजूद स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। नर्मदा किनारे की हरियाली और नर्मदा की अविरलता प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इस अवैध पेड़ कटाई के खिलाफ कार्रवाई करना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी है। नर्मदा किनारे की हरियाली का संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और पर्यावरणीय अस्तित्व का आधार है। पेड़-पौधे मनुष्यों के साथ मूक प्राणियों और पक्षियों के जीवन के लिए भी समान रूप से जरूरी है। इसलिए इस अवैध पेड़ कटाई को सख्ती से रोका जाना चाहिए। इस संबंध में बड़वानी वन विभाग रेंज के रेंजर गुलाबसिंह बरड़े से बात की तो उन्होंने बताया कि डूब क्षेत्र है, लकड़ी काटे या पेड़ हमें क्या लेना देना एनवीडीए विभाग देखें। डूब क्षेत्र की जवाबदारी एनवीडीए विभाग की है हमारी नहीं।