मूलनिवासी विभूतियों के अपमान और एकतरफा कार्रवाई पर जताया विरोध
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 7 नवंबर। जिला मुख्यालय में सर्व आदिवासी समाज जिला इकाई ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के जिलाध्यक्ष भंगाराम सोरी के नेतृत्व में यह ज्ञापन कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना को सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के मूलनिवासी समुदायों के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं परंपरागत पदाधिकारियों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, जबकि राज्य की महान विभूतियों का लगातार अपमान और मूर्तियों की तोडफ़ोड़ जैसी घटनाएं हो रही हैं, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सर्व आदिवासी समाज ने उल्लेख किया कि शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति बसना में तथा वीर गुंडाधुर धुरवा की मूर्ति जगदलपुर में खंडित की गई, परंतु आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर, मूलनिवासी समाज द्वारा विरोध दर्ज कराने पर प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है। समाज ने इसे दोयम दर्जे का भेदभावपूर्ण रवैया बताते हुए घोर आपत्ति जताई है और कहा है कि प्रवासी समुदायों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों के माध्यम से मूलनिवासियों को हाशिए पर धकेला जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ऐसे भेदभावपूर्ण कार्यों में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों एवं आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। समाज ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो राज्यभर में जनआक्रोश फैल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मूलनिवासी विभूतियों के अपमान और एकतरफा कार्रवाई पर जताया विरोध
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 7 नवंबर। जिला मुख्यालय में सर्व आदिवासी समाज जिला इकाई ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के जिलाध्यक्ष भंगाराम सोरी के नेतृत्व में यह ज्ञापन कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना को सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के मूलनिवासी समुदायों के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं परंपरागत पदाधिकारियों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, जबकि राज्य की महान विभूतियों का लगातार अपमान और मूर्तियों की तोडफ़ोड़ जैसी घटनाएं हो रही हैं, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सर्व आदिवासी समाज ने उल्लेख किया कि शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति बसना में तथा वीर गुंडाधुर धुरवा की मूर्ति जगदलपुर में खंडित की गई, परंतु आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर, मूलनिवासी समाज द्वारा विरोध दर्ज कराने पर प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है। समाज ने इसे दोयम दर्जे का भेदभावपूर्ण रवैया बताते हुए घोर आपत्ति जताई है और कहा है कि प्रवासी समुदायों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों के माध्यम से मूलनिवासियों को हाशिए पर धकेला जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ऐसे भेदभावपूर्ण कार्यों में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों एवं आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। समाज ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो राज्यभर में जनआक्रोश फैल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।