अलीराजपुर के गौरव वन रेंजर बने:राज्य वन सेवा परीक्षा में 86वीं रैंक हासिल की, 9 साल से वनरक्षक पद पर सेवा दे रहे थे

अलीराजपुर में सोंडवा विकासखंड के ग्राम बुरमा निवासी गौरव सस्तिया का चयन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पद पर हुआ है। उन्होंने राज्य वन सेवा परीक्षा 2023 में 86वीं रैंक हासिल की है। गौरव पिछले 9 वर्षों से वन मंडल आलीराजपुर में वनरक्षक के पद पर सेवा दे रहे हैं। जानिए गौरव का सफर गौरव ने वन रक्षक बनने से पहले गुजरात में मजदूरी की थी। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत बुरमा से की। माध्यमिक शिक्षा छिनकी, हाईस्कूल छकतलाऔर हायर सेकेंडरी रातीतलाई झाबुआ से की। इसके बाद उन्होंने अल्पाइन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी उज्जैन से बीई की डिग्री प्राप्त की। पिछले 9 वर्षों से वह वन मंडल आलीराजपुर में वनरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय दीपश्री एकेडमी इंदौर और होर्नबिल क्लासेज की ऑनलाइन कक्षाओं, नोट्स और टेस्ट सीरीज को दिया है। उन्होंने बताया कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास, कठिन परिश्रम और अनुशासित जीवनशैली के साथ-साथ वनरक्षक के रूप में मिले अनुभव ने उन्हें यह सफलता दिलाई है। गौरव ने अपने माता-पिता, परिवार, समाज, गुरुजनों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। उनकी यह उपलब्धि आदिवासी युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है।

अलीराजपुर के गौरव वन रेंजर बने:राज्य वन सेवा परीक्षा में 86वीं रैंक हासिल की, 9 साल से वनरक्षक पद पर सेवा दे रहे थे
अलीराजपुर में सोंडवा विकासखंड के ग्राम बुरमा निवासी गौरव सस्तिया का चयन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पद पर हुआ है। उन्होंने राज्य वन सेवा परीक्षा 2023 में 86वीं रैंक हासिल की है। गौरव पिछले 9 वर्षों से वन मंडल आलीराजपुर में वनरक्षक के पद पर सेवा दे रहे हैं। जानिए गौरव का सफर गौरव ने वन रक्षक बनने से पहले गुजरात में मजदूरी की थी। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत बुरमा से की। माध्यमिक शिक्षा छिनकी, हाईस्कूल छकतलाऔर हायर सेकेंडरी रातीतलाई झाबुआ से की। इसके बाद उन्होंने अल्पाइन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी उज्जैन से बीई की डिग्री प्राप्त की। पिछले 9 वर्षों से वह वन मंडल आलीराजपुर में वनरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय दीपश्री एकेडमी इंदौर और होर्नबिल क्लासेज की ऑनलाइन कक्षाओं, नोट्स और टेस्ट सीरीज को दिया है। उन्होंने बताया कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास, कठिन परिश्रम और अनुशासित जीवनशैली के साथ-साथ वनरक्षक के रूप में मिले अनुभव ने उन्हें यह सफलता दिलाई है। गौरव ने अपने माता-पिता, परिवार, समाज, गुरुजनों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। उनकी यह उपलब्धि आदिवासी युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है।