कर्मचारी मंच ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र-कहा ये ठीक नहीं:सीधी भर्ती के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा मंच

मध्य प्रदेश सरकार 1 लाख पदों पर कर्मचारियों की भर्ती करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस घोषणा के खिलाफ मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है। मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे ने मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिखकर इसकी सूचना भी दे दी है। पांडे कहते हैं कि यह निर्णय प्रदेश के उन स्थाई कर्मियों व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के खिलाफ है, जिन्हें नियमित करने का निर्णय विभिन्न कोर्ट सुना चुके हैं। पांडे कहते हैं कि हम भर्ती का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम उस अधिकार की मांग रहे हैं, जो हमें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। इन कर्मचारियों की नियमित पदों के विरुद्ध ही 25 से 35 साल की सेवा पूरी हो चुकी है, इतने पर भी नियमित नहीं करना विद्रोह करने पर मजबूर कर रहा है। हम चाहते हैं कि बेरोजगारों को भी रोजगार मिले और इसके लिए सरकार तमाम विभागों में खाली हजारों पदों को भरे। उन्होंने कहा कि मंच की प्रांतीय समिति ने तय किया है कि राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे और रिक्त पदों पर स्थाई कर्मियों एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग करेंगे। पांडे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि 10 वर्ष से अधिक अवधि से कार्यरत स्थाई कर्मियों, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को विभागों के रिक्त पदों पर नियमित किया जाए। सरकार ने विभागों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। यदि सरकार ने सरकारी विभागों के रिक्त पदों पर स्थाई कर्मियों एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय नहीं लिया, तो स्थाई कर्मी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मंच के नेतृत्व कोर्ट में भी लड़ेंगे और रोड पर भी।

कर्मचारी मंच ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र-कहा ये ठीक नहीं:सीधी भर्ती के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा मंच
मध्य प्रदेश सरकार 1 लाख पदों पर कर्मचारियों की भर्ती करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस घोषणा के खिलाफ मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है। मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे ने मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिखकर इसकी सूचना भी दे दी है। पांडे कहते हैं कि यह निर्णय प्रदेश के उन स्थाई कर्मियों व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के खिलाफ है, जिन्हें नियमित करने का निर्णय विभिन्न कोर्ट सुना चुके हैं। पांडे कहते हैं कि हम भर्ती का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम उस अधिकार की मांग रहे हैं, जो हमें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। इन कर्मचारियों की नियमित पदों के विरुद्ध ही 25 से 35 साल की सेवा पूरी हो चुकी है, इतने पर भी नियमित नहीं करना विद्रोह करने पर मजबूर कर रहा है। हम चाहते हैं कि बेरोजगारों को भी रोजगार मिले और इसके लिए सरकार तमाम विभागों में खाली हजारों पदों को भरे। उन्होंने कहा कि मंच की प्रांतीय समिति ने तय किया है कि राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे और रिक्त पदों पर स्थाई कर्मियों एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग करेंगे। पांडे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि 10 वर्ष से अधिक अवधि से कार्यरत स्थाई कर्मियों, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को विभागों के रिक्त पदों पर नियमित किया जाए। सरकार ने विभागों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। यदि सरकार ने सरकारी विभागों के रिक्त पदों पर स्थाई कर्मियों एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय नहीं लिया, तो स्थाई कर्मी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मंच के नेतृत्व कोर्ट में भी लड़ेंगे और रोड पर भी।