निजीकरण और आउटसोर्सिंग के विरोध में स्वा. कर्मियों ने निकाली रैली, एसडीएम को ज्ञापन

छत्तीसगढ़ संवाददाता कोण्डागांव, 23 जुलाई। जिला मुख्यालय कोण्डागांव में बुधवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले स्वास्थ्य कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन प्रशासन के नाम कोण्डागांव एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने सहित लंबित मांगों के निराकरण की मांग की है। संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर विभाग द्वारा शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। संघ ने कहा कि वेतनमान सहित अन्य मांगों को लेकर वर्ष 2023 में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन भी किया गया था, जिसके बाद शासन के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया था। ज्ञापन में स्वास्थ्य संस्थाओं में एक पाली में ओपीडी आधारित अटेंडेंस व्यवस्था, पदनाम परिवर्तन, रेडिएशन भत्ता, जोखिम भत्ता, स्वास्थ्य संस्थाओं में आवास व्यवस्था, समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान, संविदा कर्मचारियों के लिए रिक्त पदों पर सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण सहित कई मांगों का उल्लेख किया गया है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजी कंपनियों के बढ़ते हस्तक्षेप और लैब संचालन को निजी कंपनी को दिए जाने तथा अमृत फार्मेसी शुरू करने के निर्णय पर चिंता जताई है। संघ का कहना है कि इससे स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों के भविष्य के साथ-साथ आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। संघ के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार वैद्य ने बताया कि प्रांतीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखा जाना चाहिए, ताकि नियमित पद सुरक्षित रहें और लंबे समय से कार्यरत संविदा, एनएचएम, जीवनदीप समिति एवं डीएमएफ कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने से छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार पर असर पडऩे की आशंका है। संघ ने मांग की है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी लोगों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जाए, जिससे फर्जी डिग्रीधारियों पर रोक लग सके। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन नीति, जीवनदीप समिति कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता, लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए नियमित सेटअप स्वीकृत करने और स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग की है। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रांतीय निकाय के निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।

निजीकरण और आउटसोर्सिंग के विरोध में स्वा. कर्मियों ने निकाली रैली, एसडीएम को ज्ञापन
छत्तीसगढ़ संवाददाता कोण्डागांव, 23 जुलाई। जिला मुख्यालय कोण्डागांव में बुधवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले स्वास्थ्य कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन प्रशासन के नाम कोण्डागांव एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने सहित लंबित मांगों के निराकरण की मांग की है। संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर विभाग द्वारा शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। संघ ने कहा कि वेतनमान सहित अन्य मांगों को लेकर वर्ष 2023 में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन भी किया गया था, जिसके बाद शासन के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया था। ज्ञापन में स्वास्थ्य संस्थाओं में एक पाली में ओपीडी आधारित अटेंडेंस व्यवस्था, पदनाम परिवर्तन, रेडिएशन भत्ता, जोखिम भत्ता, स्वास्थ्य संस्थाओं में आवास व्यवस्था, समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान, संविदा कर्मचारियों के लिए रिक्त पदों पर सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण सहित कई मांगों का उल्लेख किया गया है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजी कंपनियों के बढ़ते हस्तक्षेप और लैब संचालन को निजी कंपनी को दिए जाने तथा अमृत फार्मेसी शुरू करने के निर्णय पर चिंता जताई है। संघ का कहना है कि इससे स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों के भविष्य के साथ-साथ आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। संघ के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार वैद्य ने बताया कि प्रांतीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखा जाना चाहिए, ताकि नियमित पद सुरक्षित रहें और लंबे समय से कार्यरत संविदा, एनएचएम, जीवनदीप समिति एवं डीएमएफ कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने से छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार पर असर पडऩे की आशंका है। संघ ने मांग की है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी लोगों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जाए, जिससे फर्जी डिग्रीधारियों पर रोक लग सके। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन नीति, जीवनदीप समिति कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता, लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए नियमित सेटअप स्वीकृत करने और स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग की है। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रांतीय निकाय के निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।