विदिशा में महाराजा दुर्गादास राठौर की प्रतिमा स्थापना की मांग:समाज ने कलेक्टर को दिए तीन जगहों के प्रस्ताव; कहा- जयंती से पहले हो स्थापना
विदिशा में महाराजा दुर्गादास राठौर की प्रतिमा स्थापना की मांग:समाज ने कलेक्टर को दिए तीन जगहों के प्रस्ताव; कहा- जयंती से पहले हो स्थापना
विदिशा में राठौर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय में महाराजा दुर्गादास राठौर की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के लिए ज्ञापन दिया। हाईवे बायपास के चौड़ीकरण के दौरान हटाई गई प्रतिमा पिछले 6 महीने से ऑडिटोरियम परिसर में रखी हुई है। समाज ने प्रतिमा स्थापना के लिए तीन स्थानों का प्रस्ताव दिया है। इनमें सुआखेड़ी बायपास रोड, लश्करपुर-गंजबासौदा रोड और बजरिया का खाली पार्क शामिल है। राठौर समाज के प्रतिनिधि भंवर लाल ने कहा कि प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाए। मुगल साम्राज्य को दी थी चुनौती
महाराजा दुर्गादास राठौर 17वीं शताब्दी के मारवाड़ (वर्तमान जोधपुर) के वीर योद्धा थे। वे औरंगजेब काल में मुगलों के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक बने। राजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद उन्होंने राजकुमार अजीत सिंह को मुगलों से बचाया। मुगलों ने मारवाड़ पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन दुर्गादास ने उनका डटकर मुकाबला किया। राठौर समाज चाहता है कि आने वाली पीढ़ियां महाराजा दुर्गादास के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। वे राजपूताना की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं।
विदिशा में राठौर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय में महाराजा दुर्गादास राठौर की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के लिए ज्ञापन दिया। हाईवे बायपास के चौड़ीकरण के दौरान हटाई गई प्रतिमा पिछले 6 महीने से ऑडिटोरियम परिसर में रखी हुई है। समाज ने प्रतिमा स्थापना के लिए तीन स्थानों का प्रस्ताव दिया है। इनमें सुआखेड़ी बायपास रोड, लश्करपुर-गंजबासौदा रोड और बजरिया का खाली पार्क शामिल है। राठौर समाज के प्रतिनिधि भंवर लाल ने कहा कि प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाए। मुगल साम्राज्य को दी थी चुनौती
महाराजा दुर्गादास राठौर 17वीं शताब्दी के मारवाड़ (वर्तमान जोधपुर) के वीर योद्धा थे। वे औरंगजेब काल में मुगलों के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक बने। राजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद उन्होंने राजकुमार अजीत सिंह को मुगलों से बचाया। मुगलों ने मारवाड़ पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन दुर्गादास ने उनका डटकर मुकाबला किया। राठौर समाज चाहता है कि आने वाली पीढ़ियां महाराजा दुर्गादास के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। वे राजपूताना की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं।