छत्तीसगढ़ संवाददाता
पिथौरा, 17 फरवरी। जंगलों से अब खैर के पेड़ों को काट कर उसकी लकड़ी की तस्करी जोरों पर है। इस अवैध कारोबार से क्षेत्र के जंगलों से बेशकीमती खैर के पेड़ धीरे-धीरे गायब हो रहे हंै।
पान खाने के शौकीनों को यह बात कम ही पता होगी कि वे जो पान खाते हैं, उसका जायका उसमें लगे कत्थे से ही बढ़ता है और यह कत्था हमारे क्षेत्र में ही पाये जाने वाले खैर पेड़ की लकड़ी से ही बनाया जाता है। पान के जायके के लिए आवश्यक कत्थे के लिए खैर की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। लिहाजा इसकी लकड़ी का चोर बाज़ार में रेट करीब 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। इस अनुसार खैर के एक ही पेड़ से तस्कर लाखों की कमाई कर रहे हंै।
वन विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी आर के एस ठाकुर ने उक्त लकड़ी के बारे में बताया कि खैर के पेड़ आम तौर पर मुरुम या पथरीली जमीन जहां पानी नहीं ठहरता, ऐसे स्थान पर ज्यादा होता है। टेढ़े मेढ़े तने वाले इस पेड़ की लंबाई 30 फीट से अधिक की भी हो सकती है। इसके पत्ते इमली के पत्तों की तरह होते हंै और तने का रंग उपर से काला एवं अंदर से लाल होता है। चूंकि इस पेड़ से पान में उपयोगी कत्था बनाया जाता है इसलिए इसकी तस्करी की जाती है। ज्ञात हो कि पूर्व में हुई तस्करी के कारण ही अब ये बेशकीमती पेड़ विलुप्त हो रहे हंै।
खैर की खैर नहीं
जबसे क्षेत्र के कुछ व्यवसायियों को यह पता चला है कि खैर की लकड़ी की कीमत 100 रुपये किलो से अधिक है, तब से क्षेत्र के कुछ युवा व्यवसायी उक्त कार्य में जुट गए हंै।
जानकर बताते हैं कि खैर के पेड़ जंगल के बीचों-बीच नहीं होते बल्कि सूनी जगह पर ही मिलते हैं, लिहाजा तस्कर पेड़ों को कटवा कर इसे छिल कर अंदर की लाल लकड़ी के 2 से 4 फीट के टुकड़े तैयार कर उन्हें बकायदा पैक कर बेचते है, जिससे उन्हें लाखों की कमाई तो होती है। परन्तु इन पेड़ों की संख्या प्रदेश के जंगलों से लगातार सिमटती जा रही है। इसके बावजूद शासन प्रशासन पेड़ों की कटाई रोकने कोई विशेष प्रयास करता दिखता नहीं है।
डेढ़ सौ लकड़ी की जब्ती की गई थी-एसडीओ
खैर तस्करी के मामले में वन विभाग पिथौरा के एसडीओ यू आर बसंत ने छत्तीसगढ़ को बताया कि विगत कुछ दिनों से खैर लकड़ी की तस्करी की शिकायत मिल रही थी। अब तक दो कार्रवाई की गई है, जिसमें 150 नग से अधिक खैर की लकड़ी जब्त की गई। वर्तमान में भी तस्करी रोकने गश्त की जा रही है।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
पिथौरा, 17 फरवरी। जंगलों से अब खैर के पेड़ों को काट कर उसकी लकड़ी की तस्करी जोरों पर है। इस अवैध कारोबार से क्षेत्र के जंगलों से बेशकीमती खैर के पेड़ धीरे-धीरे गायब हो रहे हंै।
पान खाने के शौकीनों को यह बात कम ही पता होगी कि वे जो पान खाते हैं, उसका जायका उसमें लगे कत्थे से ही बढ़ता है और यह कत्था हमारे क्षेत्र में ही पाये जाने वाले खैर पेड़ की लकड़ी से ही बनाया जाता है। पान के जायके के लिए आवश्यक कत्थे के लिए खैर की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। लिहाजा इसकी लकड़ी का चोर बाज़ार में रेट करीब 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। इस अनुसार खैर के एक ही पेड़ से तस्कर लाखों की कमाई कर रहे हंै।
वन विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी आर के एस ठाकुर ने उक्त लकड़ी के बारे में बताया कि खैर के पेड़ आम तौर पर मुरुम या पथरीली जमीन जहां पानी नहीं ठहरता, ऐसे स्थान पर ज्यादा होता है। टेढ़े मेढ़े तने वाले इस पेड़ की लंबाई 30 फीट से अधिक की भी हो सकती है। इसके पत्ते इमली के पत्तों की तरह होते हंै और तने का रंग उपर से काला एवं अंदर से लाल होता है। चूंकि इस पेड़ से पान में उपयोगी कत्था बनाया जाता है इसलिए इसकी तस्करी की जाती है। ज्ञात हो कि पूर्व में हुई तस्करी के कारण ही अब ये बेशकीमती पेड़ विलुप्त हो रहे हंै।
खैर की खैर नहीं
जबसे क्षेत्र के कुछ व्यवसायियों को यह पता चला है कि खैर की लकड़ी की कीमत 100 रुपये किलो से अधिक है, तब से क्षेत्र के कुछ युवा व्यवसायी उक्त कार्य में जुट गए हंै।
जानकर बताते हैं कि खैर के पेड़ जंगल के बीचों-बीच नहीं होते बल्कि सूनी जगह पर ही मिलते हैं, लिहाजा तस्कर पेड़ों को कटवा कर इसे छिल कर अंदर की लाल लकड़ी के 2 से 4 फीट के टुकड़े तैयार कर उन्हें बकायदा पैक कर बेचते है, जिससे उन्हें लाखों की कमाई तो होती है। परन्तु इन पेड़ों की संख्या प्रदेश के जंगलों से लगातार सिमटती जा रही है। इसके बावजूद शासन प्रशासन पेड़ों की कटाई रोकने कोई विशेष प्रयास करता दिखता नहीं है।
डेढ़ सौ लकड़ी की जब्ती की गई थी-एसडीओ
खैर तस्करी के मामले में वन विभाग पिथौरा के एसडीओ यू आर बसंत ने छत्तीसगढ़ को बताया कि विगत कुछ दिनों से खैर लकड़ी की तस्करी की शिकायत मिल रही थी। अब तक दो कार्रवाई की गई है, जिसमें 150 नग से अधिक खैर की लकड़ी जब्त की गई। वर्तमान में भी तस्करी रोकने गश्त की जा रही है।