संकरी सड़कें, अतिक्रमण और भारी वाहनों से जाम:जौरा में NH-552 बना जाम का गढ़, रोजाना घंटों जाम में फंस रहे वाहन, यात्री परेशान
संकरी सड़कें, अतिक्रमण और भारी वाहनों से जाम:जौरा में NH-552 बना जाम का गढ़, रोजाना घंटों जाम में फंस रहे वाहन, यात्री परेशान
मुरैना जिले के जौरा कस्बे से होकर गुजरने वाले नेशनल हाइवे 552 पर इन दिनों यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। इस मार्ग पर रोजाना घंटों तक लगने वाला जाम न केवल राहगीरों की परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि व्यापार, आपात सेवाओं और क्षेत्र के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। बावजूद इसके, प्रशासन और यातायात विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बता दें कि, नेशनल हाइवे 552, जो जौरा कस्बे के बीच से होकर गुजरता है, इन दिनों जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सुबह और शाम के समय, जब ट्रैफिक का दबाव चरम पर होता है, सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार जाम की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि वाहन चालकों को 2 से 3 घंटे तक रास्ता पार करने में लग जाते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, जाम स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है कि यह समस्या अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। मुख्य कारणों में सड़क पर बढ़ता अतिक्रमण, भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही, बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन और कस्बे के अंदर संकरी सड़कों की स्थिति शामिल है। कहते हैं वाहन चालक व दुकानदार एक ट्रक चालक महेश यादव ने बताया, “हम दिन में दो-दो घंटे जाम में फंसे रहते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है। व्यापार में नुकसान और मानसिक तनाव अलग से होता है।” वहीं, स्थानीय दुकानदार संजीव गुप्ता का कहना है, “कई ग्राहक जाम की वजह से हमारी दुकान तक पहुंच ही नहीं पाते। व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।” जाम के पीछे मुख्य समस्याएं प्रशासन की लापरवाही स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे कई बार प्रशासन को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं, ठोस कार्यवाही नहीं। यातायात पुलिस की संख्या क्षेत्र में बेहद कम है, जिससे जाम की स्थिति को नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो जाता है। बोलीं सामाजिक कार्यकर्ता एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता पूजा अग्रवाल ने कहा, “हमने कई बार प्रशासन से निवेदन किया है कि अतिक्रमण हटाया जाए, ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधारा जाए, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है।” समाधान की जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक सक्रियता से ही संभव है। सबसे पहले अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की आवश्यकता है। साथ ही, भारी वाहनों के लिए टाइम स्लॉट तय कर उन्हें दिन के व्यस्त समय में प्रवेश करने से रोका जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, स्थानीय ट्रैफिक पुलिस को पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों से सुसज्जित किया जाना चाहिए ताकि वह मौके पर रहकर ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके।
मुरैना जिले के जौरा कस्बे से होकर गुजरने वाले नेशनल हाइवे 552 पर इन दिनों यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। इस मार्ग पर रोजाना घंटों तक लगने वाला जाम न केवल राहगीरों की परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि व्यापार, आपात सेवाओं और क्षेत्र के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। बावजूद इसके, प्रशासन और यातायात विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बता दें कि, नेशनल हाइवे 552, जो जौरा कस्बे के बीच से होकर गुजरता है, इन दिनों जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सुबह और शाम के समय, जब ट्रैफिक का दबाव चरम पर होता है, सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार जाम की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि वाहन चालकों को 2 से 3 घंटे तक रास्ता पार करने में लग जाते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, जाम स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है कि यह समस्या अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। मुख्य कारणों में सड़क पर बढ़ता अतिक्रमण, भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही, बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन और कस्बे के अंदर संकरी सड़कों की स्थिति शामिल है। कहते हैं वाहन चालक व दुकानदार एक ट्रक चालक महेश यादव ने बताया, “हम दिन में दो-दो घंटे जाम में फंसे रहते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है। व्यापार में नुकसान और मानसिक तनाव अलग से होता है।” वहीं, स्थानीय दुकानदार संजीव गुप्ता का कहना है, “कई ग्राहक जाम की वजह से हमारी दुकान तक पहुंच ही नहीं पाते। व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।” जाम के पीछे मुख्य समस्याएं प्रशासन की लापरवाही स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे कई बार प्रशासन को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं, ठोस कार्यवाही नहीं। यातायात पुलिस की संख्या क्षेत्र में बेहद कम है, जिससे जाम की स्थिति को नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो जाता है। बोलीं सामाजिक कार्यकर्ता एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता पूजा अग्रवाल ने कहा, “हमने कई बार प्रशासन से निवेदन किया है कि अतिक्रमण हटाया जाए, ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधारा जाए, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है।” समाधान की जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक सक्रियता से ही संभव है। सबसे पहले अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की आवश्यकता है। साथ ही, भारी वाहनों के लिए टाइम स्लॉट तय कर उन्हें दिन के व्यस्त समय में प्रवेश करने से रोका जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, स्थानीय ट्रैफिक पुलिस को पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों से सुसज्जित किया जाना चाहिए ताकि वह मौके पर रहकर ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके।